5 सितम्बर यानि 'शिक्षक दिवस' फिर आने वाला है । डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने की परंपरा अब 50 वर्षों से भी अधिक पुरानी हो चुकी है ...और यह वह दिन होता है जिस दिन समाज या देश के लिए शिक्षक के योगदान या कर्तव्य को याद किया जाता है ..उसका सम्मान किया जाता है ।
पर अब शिक्षकों के लिए निर्धारित इस दिन भी शिक्षकों की सुने जाने की जगह उन्हें कर्तव्य की घुट्टी पिलाने की तैयारी की जा रही है । यहां तक कि शैक्षिक नीतियों के निर्माण में भी शिक्षक की भूमिका नगण्य है। पन्त प्रधान इस दिन शिक्षक को समाज का सबसे भ्रष्ट कर्मचारी मानते हुए 'दिन में तीन बार हाजिरी देने की' अद्भुत नियमावली व एप की घोषणा करने जा रहे हैं जबकि जेल में कैदियों की भी दो बार ही हाजिरी होती है।
इस शिक्षक दिवस के अवसर पर नीति नियंताओं से अनुरोध है कि वह शिक्षा में डिजिटल माध्यमों का उपयोग जरूर करें पर शिक्षक को मात्र रोबोट बनाकर न रखें वरन् उसको शिक्षक भी बने रहने दे जिसका एकमात्र कार्य शिक्षण करना और अपने विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना हो।



